Saturday, 1 July 2017

लोग तमाशा देखते हैं, पुलिस की मदद नहीं करते: अदालत

लोग तमाशा देखते हैं, पुलिस की मदद नहीं करते: अदालत

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि यह आम बात हो गई है कि किसी अपराध के समय लोग तमाशाई बने रहते हैं और जांच में पुलिस की मदद नहीं करते। अदालत ने दस साल की मासूम बच्ची का पीछा करने के एक मामले में पीड़िता के बयान पर भरोसा किया क्योंकि जिन इलाकों में उसका पीछा करने की घटनाएं हुईं वहां के लोगों और राहगीरों ने जांच से खुद को अलग रखा। बच्ची ने शिकायत की थी कि सूरज नाम का एक शख्स उसका पीछा करता है। उसने अलग अलग तारीखों पर चार बार उसका पीछा किया। उसने करेंसी नोट दिखा कर और खाने पीने की चीजें दे कर उसे फुसलाने की कोशिश की। यह शख्स 18 महीने तक जेल में रहने के बाद अभी जमानत पर है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार सरपाल ने कहा कि यह देखा जा रहा है कि लोग पुलिस कार्यवाहियों से परहेज करने की कोशिश करते हैं और आम तौर पर पुलिस थाने या अदालत जा कर आपराधिक मामलों में शिरकत नहीं करते। उन्होंने कहा वह घटनास्थल पर जा कर तमाशा देखने के लिए तैयार हैं लेकिन पुलिस प्रशासन के साथ सहयोग नहीं करते। एेसे में जांच अधिकारी के इस बयान पर अविश्वास नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कुछ राहगीरों या पड़ोसियों से जांच में शामिल होने के लिए कहा लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
अदालत ने सूरज को पांचवी क्लास में पढने वाली छात्रा का बार-बार पीछा करने का दोषी ठहराया है। अदालत संभवत: अगले हफ्ते आदेश सुनाएगी कि बच्ची का पीछा करने के अपराध में सूरज को कितनी सजा दी जाएगी। इस मामले में पहली बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल और दोबारा एेसा करने पर पांच साल की सजा का प्रावधान कानून में है.............                                                                                                        

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