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Saturday, 14 October 2017

गर्भवती महिला और उसके पति को विकलांग डिब्बे से बाहर निकाल कर फेंका



मुंबई सीएसटी स्टेशन से विट्ठालवादी स्टेशन आने के लिए निकली एक गर्भवती महिला और उसके पति को कुर्ला स्टेशन पर विकलांग डिब्बे से बाहर फेंक दिया गया. रेलवे जीआरपी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया.

मुंबई सीएसटी स्टेशन से विट्ठालवादी स्टेशन के तरफ सफर कर रही अरुणा यादव जो 8 महीने की गर्भवती हैं, अपने पति के साथ इस ट्रेन के विकलांग डिब्बे में सफर कर रही थीं कि लोगों ने उन्हें ट्रेन से निकाल फेंका.

सेंट्रल रेलवे डीसीपी समाधान पवार ने जानकारी दी कि हादसा 10 दिसंबर शाम करीब 7- 7.30 का है, जब अरुणा यादव और उनके पति दिनेश यादव, अरुणा के रेगुलर चेकअप के लिए सीएसटी में मौजूद कामा हॉस्पिटल से लौट रहे थे. शाम की भीड़ को देखते हुए अरुणा और उनके पति ने विकलांग डिब्बे में बैठने का सोचा.

जैसे ही लोकल कुर्ला स्टेशन पहुंची वहां कुछ लोग चढ़े और गर्भवती अरुणा को अपनी सीट पर बैठे देखा. यहीं से झगड़े की शुरुआत हुई और भीड़ में से कुछ लोग इन दोनों को उठने के लिए कहने लगे. एक दो लोग तो इन पर चिल्लाने भी लगे. मामला बढ़ता देख कुछ लोगो ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन इस सब से बात नहीं बनी और दिनेश और अरुणा को लोकल ट्रेन से उतार दिया.

ताज्जुब की बात तो ये है कि इस मामले में पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा. जब दोनों पति-पत्नी जीआरपी कुर्ला स्टेशन गए तो पहले तो पुलिस ने शिकायत ही लेने में आनाकानी की और उसके बाद इनकी शिकायत पर एनसी रजिस्टर कर लिया. बाद में जब लोकल ट्रेन में सवार दूसरे यात्री जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया था उन्होंने इसका पुलिस स्टेशन में विरोध किया तब जाकर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज किया.

जब भी मुंबई और लोकल ट्रेन का जिक्र होता है तब इसे हमेशा जिंदादिली से जोड़ा जाता है. लेकिन इस वाकये ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या अपने काम की व्यवस्तता हमे तंग दिल बनाती जा रही है जिसमें इंसानियत की भी कोई जगह नहीं बची है.

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